काश…
कभी-कभी ज़िंदगी इतनी चुपके से एक सच सामने रख देती है कि हम समझ ही नहीं पाते कि उसे कैसे संभालें। एक जीता-जागता इंसान, जिससे हमें Problems थीं… Issues थे… Grudges थे… जिसके किसी एक वाक्य ने हमें hurt किया था, किसी एक behaviour ने हमें अंदर तक तोड़ दिया था… एकदम से चला जाता है। बस एक खबर आती है। और उस खबर के साथ, जैसे अंदर कुछ टूट कर बिखर जाता है। उस पल समझ आता है कि जिन बातों को हम इतना बड़ा समझ रहे थे, जिन वजहों से हमने बात करना कम कर दिया, Calls avoid
कर दीं,messages का reply नहीं दिया, सामने आने पर नज़रें चुरा लीं… वो सब कितना छोटा था। कितना Irrelevant था। वो ego, वो गुस्सा, वो “पहले वो आए बात करने”, वो “मुझे फ़र्क नहीं पड़ता”, वो “अब मेरा उससे कोई relation नहीं”... सब एक पल में खत्म हो जाता है।
क्योंकि जब वो इंसान ही नहीं रहता, तब problems से ज़्यादा उसकी आवाज़ याद आती है। उसका नाम स्क्रीन पर आना याद आता है। उसका बिना मतलब का call करना याद आता है। उसका वो annoying सा message, वो बार-बार पूछना, वो छोटी-छोटी बातों पर argue करना… सब याद आता है। और फिर हम अपने आप से पूछते हैं, क्या इतना मुश्किल था एक बार बात कर लेना ? क्या इतना मुश्किल था कह देना कि हाँ, मुझे बुरा लगा था, पर तुम अपने हो ? क्या इतना मुश्किल था एक बार मिल लेना? एक बार गले लग लेना? एक बार पूछ लेना कि तुम ठीक हो?
पर कुछ सवालों के जवाब कभी नहीं मिलते। कुछ conversations कभी पूरी नहीं होतीं। कुछ “sorry” दिल में ही रह जाते हैं। कुछ “I Miss You” कभी किसी तक पहुँच नहीं पाते। और कुछ लोग चले जाने के बाद भी हर जगह मिलते रहते हैं। उनके contact नंबर में। उनकी पुरानी chats में। किसी फोटो के corner में। किसी song में। किसी road पर। किसी perfume की smell में। किसी random date पर। किसी आदत में जो उनसे जुड़ी थी। कभी फोन contacts scroll वक्त उनका number सामने आ जाता है। उंगली उस नंबर पर रुक जाती है। दिल कहता है call कर लो। एक बार बस कॉल कर लो। फिर दिमाग याद दिलाता है कि अब वहाँ से कोई “Hello” नहीं आएगा। और वही पल सबसे ज़्यादा भारी होता है।
जब वो इंसान सामने होता है, हम कई बार उसकी value समझ नहीं पाते। हम सोचते हैं वक्त बहुत है। कल बात कर लेंगे। कभी मिल लेंगे। एक दिन सब ठीक हो जाएगा। लेकिन ज़िंदगी हर किसी को वो “एक दिन” नहीं देती। इसलिए अगर किसी से गुस्सा है, तो गुस्सा रखो, पर दिल में ज़हर मत रखो। अगर किसी ने hurt किया है, तो अपनी feelings कह दो। अगर दूरी है, तो ज़रूरी नहीं कि सब कुछ पहले जैसा हो जाए, पर इतना ज़रूर हो कि कल को उनके चले जाने पर तुम्हारे पास सिर्फ regret न बचे। क्योंकि इंसान के जाने के बाद हम उससे जीते हुए सारे हिसाब भूल जाते हैं। तब बस एक ही बात रह जाती है: काश… एक बार और मिल लेते। काश… एक बार और बात कर लेते। काश… जो कहना था, वो कह देते। और काश… उनके होते हुए ही समझ लेते कि वो कितने ज़रूरी थे।

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