प्यार का वो पहला एहसास…
हर किसी की ज़िंदगी चाहे कितनी भी क्यों न बदल
जाए, कुछ चीज़ें कभी नहीं
बदलतीं। जैसे स्कूल का वो पहला दिन… जब सब कुछ नया था, लेकिन पता नहीं
क्यों दिल में एक अलग-सी खुशी थी। वो पहला दोस्त, जिसे हमने जाने
कब अपना “बेस्ट फ्रेंड” कह दिया था। वो पहला पैसा, जो हमने खुद
कमाया या बचाया और उससे खरीदी अपनी पहली चीज़। और वो पहला फोन… जिसे हाथ में लेकर ऐसा लगा था
जैसे अचानक हम थोड़े बड़े हो गए हों, थोड़े आज़ाद… और शायद थोड़ा ज़्यादा आत्मविश्वासी भी।
लेकिन इन सबके बीच एक एहसास ऐसा भी होता है, जिसकी जगह दिल में सबसे अलग होती है… प्यार का वो पहला एहसास। वो एहसास, जिसे शायद हम उस वक्त प्यार का नाम भी नहीं दे पाते। बस किसी एक इंसान को देखते ही चेहरे पर अपने आप मुस्कान आ जाती थी। वो सामने से निकल जाए, तो दिल कुछ पल के लिए जैसे अपनी ही धुन भूल जाता था। फिल्मों में हीरो को देखकर जिसके पीछे गिटार बजता था न… पहली बार समझ आता था कि शायद वो सब सिर्फ फिल्मों में नहीं होता।
उसकी एक झलक मिल जाए, तो पूरा दिन अच्छा लगने लगता था। रास्ते में अकेले
चलते-चलते अचानक मुस्कुरा देना… बिना किसी वजह के फोन बार-बार देखना… और फिर खुद से ही पूछना, “शायद उसका मैसेज आया हो…” कभी किसी काम के बीच अचानक उसी की याद आ जाना। और फिर कुछ देर के लिए बाकी सब भूल जाना। उसका नाम कहीं सुनाई दे जाए, तो पता नहीं क्यों दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ हो
जाती थी। उसकी पसंद अपनी
पसंद लगने लगती थी। उसकी छोटी-सी
खुशी अपनी खुशी बन जाती थी। और उसकी नाराज़गी… जाने क्यों पूरे दिन मन खराब कर देती थी।
सबसे खूबसूरत बात ये थी कि उस समय हमें कुछ चाहिए भी नहीं होता था। न कोई रिश्ता चाहिए था, न कोई वादा, न कोई भविष्य। बस वो इंसान खुश रहे… कहीं से दिख जाए… कभी बात हो जाए…और कभी-कभी बस उसका नाम सुनने को मिल जाए। शायद यही होता है पहला प्यार। जो हमें किसी और से पहले, खुद से मिलवाता है। वो हमें सिखाता है कि किसी के आने से दिल में कितनी हलचल हो सकती है। बिना किसी वजह के हँसा जा सकता है। किसी की एक छोटी-सी बात पूरे दिन याद रखी जा सकती है।

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