एक शब्द
कभी सोचा है… जिस बात को बोलकर आप 10 मिनट बाद भूल जाते हैं, हो सकता है सामने वाला उसे 10 साल बाद भी न भूल पाए। हम अक्सर कहते हैं, “मैं गुस्से में था, मेरा वो मतलब नहीं था। हो सकता है सच में ऐसा हो। लेकिन कभी-कभी गुस्सा उन बातों को भी बाहर निकाल देता है जिन्हें हम लंबे समय से अपने अंदर दबाए हुए होते हैं, और जब कोई बात गुस्से में बाहर आती है, सामने वाला सिर्फ उस एक sentence को नहीं सुनता। उसे आपके पुराने reactions,
comments और व्यवहार याद आने लगते हैं। अचानक कई पुरानी बातें जुड़ने लगती हैं… और उसके मन में आपके लिए एक नया perspective
बन सकता है। सबसे painful बात यह है कि आप उसे बाद में हजार बार समझा सकते हैं कि, मेरा वो मतलब नहीं था, लेकिन उसके मन में पैदा हुआ doubt इतनी आसानी से नहीं जाता, और अगर गुस्से में कही बात उसकी किसी पुरानी insecurity पर लग जाए, उसके looks,
body, family, career, पैसे या self-confidence पर, तो आपके लिए वो सिर्फ एक sentence हो सकता है, लेकिन उसके लिए वो सालों की मेहनत और struggle को फिर से हिला सकता है। खासकर तब, जब उसने अपनी insecurity आपसे इसलिए share की थी क्योंकि वह आपको अपना safe
person समझता था, अगर वही vulnerability कभी उसके खिलाफ इस्तेमाल हो जाए, तो सिर्फ argument नहीं टूटता… trust टूटता है।
इसलिए अगली बार गुस्से में कुछ बोलने से पहले खुद से पूछिए, मैं ये बात समझाने के लिए बोल रहा हूँ… या सामने वाले को उतना ही hurt करने के लिए जितना मैं खुद hurt हूँ? अगर जवाब दूसरा है… तो रुक जाइए, चुप हो जाइए, थोड़ा दूर चले जाइए, लेकिन वो शब्द मत बोलिए, क्योंकि गुस्सा temporary होता है, लेकिन आपके शब्द permanent memory बन सकते हैं, और अगर आपके अंदर सच में कोई शिकायत या resentment लंबे समय से है, तो उसे जरूर कहिए, लेकिन गुस्से में हथियार बनाकर नहीं। शांत होकर, ईमानदारी से और सम्मान के साथ, क्योंकि uncomfortable truth बोलना गलत नहीं है, गलत यह है कि सालों तक कुछ दबाते रहें और फिर एक दिन गुस्से में सब कुछ सामने वाले पर फेंक दें।
इसलिए गुस्से में कही हर बात को न हमेशा सच मानिए, न हमेशा झूठ समझकर भूल जाइए। कभी-कभी उसके पीछे कोई ऐसी feeling छिपी होती है जिसे समझना जरूरी है, क्योंकि इंसान कई बार आपके words से ज्यादा… आपकी नजर में अपनी जगह खोने से टूटता है, इसलिए अगली बार गुस्सा आए तो बस एक पल रुकिए, आप नहीं जानते सामने वाला पहले ही कितनी लड़ाइयाँ लड़कर आपके सामने खड़ा है, आप नहीं जानते आपकी एक बात उसके अंदर कौन-सा पुराना घाव खोल देगी। लड़ाई खत्म हो जाएगी, गुस्सा खत्म हो जाएगा, Argument भी खत्म हो जाएगा, लेकिन आपके शब्द… कभी-कभी सामने वाले के अंदर बहुत लंबे समय तक ज़िंदा रहते हैं, और कभी-कभी… बस एक शब्द काफी होता है।

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